Roadway Solutions जिस प्रोजेक्ट का सपना खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देखा है एसे बहुचर्चित एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का काम जोरों शोरों से गुजरात में चल रहा है । यह प्रोजेक्ट गुजरात के विकास की गति को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों की सहूलियत-सुविधा में बढौतरी करेगा और लोगों के लिए उपयोगी रहेगा.किन्तु दिक्कत तब खड़ी होती है जब इस प्रोजेक्ट का काम करने के लिए जिन कंपनियों को जिम्मेदारी दी गई होती है वह कंपनियां जब अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से न निभाएं तब ऐसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूर्ण करने में विलंब होता है जिससे राज्य , क्षेत्र और साथ-साथ देश की प्रगति में अवरोध खड़ा होता है ऐसा ही एक किस्सा एक्सप्रेस-वे गुजरात के प्रोजेक्ट के चैनल 8 9 और 10 में देखने को मिल रहा है ।
यहां पर एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट में मिट्टी वगैरह का कॉन्ट्रैक्ट लेने वाले कॉन्ट्रैक्टरो को पिछले 7 महीना से भूगतान नहीं किया गया है और बकाया राशि दिनप्रतिदिन बढती ही जा रही है. इनमें कई ऐसे ठेकेदार हैं जिनकी कई गाड़ियां बैंक लोन की ईएमआई न भर पाने के कारण जप्त हुई है और कई ऐसे ठेकेदार भी है जो पेमेंट न मिलने के कारण व्यापारियों और मज़दूरों का पेमेंट नहीं चुका पा रहे हैं इस कारण से उनके साथ भी बकाया पैसा मांगने वाले लोग बार-बार आकर तगादा करते है और साथ दुर्व्यवहार भी करते हैं ।

जब यह ठेकेदार सभी इकट्ठा होकर रोडवेज कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर गुंजन मिश्रा से मिलने जाते हैं तो वहां से भी इनको कोई योग्य जवाब नहीं मिलता और मीडिया द्वारा भी जब रोडवेज कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर से सवाल पूछे जाते हैं तो जवाब मिलता है सिर्फ ” नो कमेंट्स ”
ऐसी परिस्थिति के निर्माण से एक्सप्रेस-वे का जिस गति से विकास होना चाहिए वह तो नहीं पा रहा है. साथ में ही ऐसे कांट्रैक्ट्स के जिनके करोड़ों रुपए रोडवेज कंपनी द्वारा भूगतान करना बाकी हैं उनका भी एक प्रकार से आर्थिक शोषण हो रहा है.

आर्थिक तंगी का सामना कर रहे ठेकेदारों को ओपन मार्केट से भी उनको पैसा जूटाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है.
अब बात यह है की एसे ठेकेदारों का मार्केट में एक अलग विश्वसनीय नाम होने के पश्चात भी उनको पैसा नहीं मिला पा रहा है, और यही कारण है की यह सारे ठेकेदार अन्य लोगों का पैसा नहीं चुका पा रहे हैं उनका भी नाम खराब होता है कई ठेकेदार ऐसे हैं जो इतने हताश हो चुके हैं की परेशान होकर खुद का जीवन त्यागने तक की बात कर रहे हैं देखना यही है कि विकसित भारत का जो सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेकर चल रहे हैं क्या वह इस तरह पूरा हो पाएगा ? क्या जिस गति से एक्सप्रेस-वे चैनल 8 9 10 का निर्माण हो रहा है वो सही है ? पेमेंट रुकने की वजह से जो काम अटका पड़ा है उसके लिए कौन जिम्मेदार ? एक ठेकेदार के अंदर अनेक लोग काम करते हैं और उनको पेमेंट मिलता है तो वह दूसरों को पेमेंट दे पाते हैं अगर उमका ही पेमेंट नहीं मिलेगा तो काम कैसे होगा ? यह बात रोडवेज कंपनी के हवाबाज मेनेजमेन्ट की पोल खोल रही है.

