भारत और फ्रांस की गहरी होती रणनीतिक साझेदारी अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर बड़े कारखानों के रूप में आकार ले रही है। कर्नाटक के वेमागल में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरबस के H125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर असेंबली संयंत्र का उद्घाटन इसी अटूट रिश्ते का एक जीता-जागता प्रमाण है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस समारोह को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि फ्रांस के साथ हमारा सहयोग अब असीमित अवसरों के दौर में प्रवेश कर चुका है। यह संयंत्र न केवल तकनीकी कौशल का प्रदर्शन है, बल्कि भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता में वैश्विक भरोसे की मुहर भी है।
इस नई परियोजना का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी काफी व्यापक होने वाला है। रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि वेमागल के इस अत्याधुनिक संयंत्र में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जा रहा है। इतनी बड़ी पूंजी के निवेश से न केवल क्षेत्र के औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। राजनाथ सिंह ने H125 सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर की तारीफ करते हुए कहा कि इसकी विश्वसनीयता पूरी दुनिया में मानी जाती है। भारत में इसके निर्माण से न केवल घरेलू जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि भविष्य में यहाँ से विदेशों को निर्यात करने की भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को नई गति देने वाला है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार की नीतियों ने विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) को भारत में अपनी जड़ें जमाने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने C295 परिवहन विमान परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वैश्विक कंपनियां अब भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक विनिर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) के रूप में देख रही हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए कड़े सुधारों का परिणाम है।
रक्षा क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें आयुध कारखानों का निगमीकरण, निवेश नियमों का उदारीकरण और औद्योगिक गलियारों की स्थापना शामिल है। राजनाथ सिंह ने विशेष रूप से प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं का जिक्र किया, जिसने MSMEs, स्टार्टअप्स और निजी क्षेत्र को रक्षा उत्पादन की मुख्यधारा में आने के लिए प्रेरित किया है। वेमागल का यह नया हेलीकॉप्टर प्लांट इसी सिलसिले की एक अगली कड़ी है, जो भारत को रक्षा क्षेत्र में एक ‘ग्लोबल पावरहाउस’ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।


