Robert Vadra नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। शनिवार को इस मामले पर विचार होना था, लेकिन संबंधित जज सुशांत चंगोट्रा के उपलब्ध न होने के कारण अदालत ने अब अगली सुनवाई के लिए 4 अप्रैल की तारीख तय की है। इस दौरान वाड्रा के वकील ने कोर्ट में अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई ठोस मामला नहीं बनता है, इसलिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट पर कोर्ट को संज्ञान नहीं लेना चाहिए।
यह पूरा विवाद साल 2008 में गुरुग्राम के शिकोहपुर में हुए एक भूमि सौदे से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि वाड्रा की कंपनी ‘मेसर्स स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ ने साढ़े तीन एकड़ जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से महज 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि जमीन का मालिकाना हक सिर्फ 24 घंटे के भीतर वाड्रा की कंपनी के नाम ट्रांसफर हो गया। बाद में, 2012 में इसी जमीन को डीएलएफ (DLF) को भारी मुनाफे के साथ 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि इस सौदे में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं और अनुचित लाभ कमाया गया।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने 17 जुलाई, 2025 को रॉबर्ट वाड्रा और 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद अगस्त 2025 में कोर्ट ने सभी आरोपियों को समन जारी कर तलब किया था। ईडी अब तक इस मामले में वाड्रा और उनकी कंपनी से जुड़ी करीब 37.64 करोड़ रुपये मूल्य की 43 संपत्तियों को कुर्क कर चुकी है। साल 2018 में दर्ज हुई एफआईआर के बाद से यह मामला राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें 4 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां कोर्ट ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने या न लेने पर फैसला कर सकता है।


